
िहंदुस्तान की इकहत्तरवी वर्षगांठ के अवसर पर हमने अपने पाठकों को िवस्मयकारी बदलावों से गुजर रहे भारत की शक्ल से रूबरू कराने के िलए बदलता भारत नाम से एक िवशेषज्ञ पाक्िषक पेज का आयोजन िकया था। हमारे पाठकों के बीच उसकी भारी लोकप्िरयता प्रमाण है िक भिवष्य के साझा राष्टीय सपनों में िहंदुस्तान के पाठकों की िकतनी गहरी रुिच है। देश के पूर्व प्रधानमंत्िरयों से लेकर युवा वैज्ञािनकों और िवदेशी िवश्विवद्यालयों के शोधकर्ताओं तक का जो आकलन इस पेज पर छपता रहा उससे जािहर है िक िनरंतर युवा होता भारत अपने सनातन दलदल अवसाद और हीनताबोध से उबरकर शायद सिदयों बाद िफर से िवश्व आकाशा में एक लंबी खुली उडान भरने को पर तौल रहा है.
पर कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रीय सपनों के साझा जुनून में बदलने का दश्य जनता के बीच बैठकर ही देखा समझा जा सकता है। इसे िसर्फ सरकारों के भरोसे नहीं छोडा जा सकता. और इसिलए हम अपने पाठकों के बीच पैठकर िहंदुस्तान की मार्फत भिवष्य के भारत की बहुरंगी पहचान का साक्षात्कार करना चाहते हैं. आने वाले िदनों में हम आपको बदलते भारत के स्वरूप पर देश के तमाम क्षेत्रों से िशखर व्यक्ितत्वों के िवचारों से न िसर्फ पिरिचत कराएंगे बल्िक आपको उन िवचारों पर अपनी सहमित असहमित की प्रितक्िरयाओं को एसएमएस 54242 पर िहंदुस्तान दैिनक की साइट पर और इस ब्लॉग के मार्फत आगे बढाने की एक ताजा मुिहम में शामिल करेंगे. यह कैसे िकया जाएगा इसकी स्पष्ठ जानकारी आपको िनयमित तौर पर िमलेगी. तो आइए एक साथ आप और हम देखना शुरू करते हैं िक िसतारों के आगे कैसा जहां है।
मृणाल पाण्डे
पर कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रीय सपनों के साझा जुनून में बदलने का दश्य जनता के बीच बैठकर ही देखा समझा जा सकता है। इसे िसर्फ सरकारों के भरोसे नहीं छोडा जा सकता. और इसिलए हम अपने पाठकों के बीच पैठकर िहंदुस्तान की मार्फत भिवष्य के भारत की बहुरंगी पहचान का साक्षात्कार करना चाहते हैं. आने वाले िदनों में हम आपको बदलते भारत के स्वरूप पर देश के तमाम क्षेत्रों से िशखर व्यक्ितत्वों के िवचारों से न िसर्फ पिरिचत कराएंगे बल्िक आपको उन िवचारों पर अपनी सहमित असहमित की प्रितक्िरयाओं को एसएमएस 54242 पर िहंदुस्तान दैिनक की साइट पर और इस ब्लॉग के मार्फत आगे बढाने की एक ताजा मुिहम में शामिल करेंगे. यह कैसे िकया जाएगा इसकी स्पष्ठ जानकारी आपको िनयमित तौर पर िमलेगी. तो आइए एक साथ आप और हम देखना शुरू करते हैं िक िसतारों के आगे कैसा जहां है।
मृणाल पाण्डे